राजस्थान में "सार्थक नाम अभियान": 'घसीटाराम' और 'मक्खी सिंह' जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, 1500 बच्चों की बदली पहचान

राजस्थान में "सार्थक नाम अभियान": 'घसीटाराम' और 'मक्खी सिंह' जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, 1500 बच्चों की बदली पहचान

"Sarthak Naam Abhiyan" in Rajasthan

जयपुर। "Sarthak Naam Abhiyan" in Rajasthan, राजस्थान में शिक्षा विभाग ने राज्य के स्कूलों में विद्यार्थियों के ''घसीटाराम'', ''भालू सिंह'', 'घासी राम'', ''मक्खी सिंह'', जैसे अजीब नाम बदलने के लिए पहल की है।

इसके तहत ''सार्थक नाम अभियान'' शुरू किया गया है और शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापकों को 2950 शब्दों की एक सूची भेजकर कई नाम सुझाए हैं।

निर्देश हैं कि प्रधानाध्यापक अजीब नाम वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की सहमति से सूची में से कोई एक नाम संबंधित विद्यार्थी का रख सकेंगे। इस अभियान में अब तक करीब डेढ़ हजार विद्यार्थियों के नाम बदले जा चुके हैं।

अजीव नाम वाले विद्यार्थियों को कई बार स्कूल में हीनभावना का सामना करना पड़ता है। ऐसे विद्यार्थियों के सरकारी रिकार्ड में नाम बदलने को लेकर यह अभियान शुरू किया गया है। हालांकि, शिक्षा विभाग द्वारा नामों की भेजी सूची में भी कई ऐसे नाम सुझाए गए हैं, जिनमें व्याकरण की गलती है।

जैसे असम नाम सुझाया गया है, जबकि सही शब्द आसिम है। सुझाए गए नामों की सूची में रोनक, संतोख, तारचंद जैसे नाम हैं, जबकि सही नाम रौनक, संतोष व ताराचंद हैं।

राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि व्यक्ति का नाम उसके व्यक्तित्व, संस्कार और सामाजिक छवि का दर्पण होता है। नाम व्यक्ति की पहचान और विशिष्टता को दर्शाता है।